नए लेबर कोड में कर्मचारियों के लिए क्या बदलता है?
भारत के कर्मचारियों के लिए लेबर कोड में ये बदलाव हैं: लिखित अपॉइंटमेंट लेटर, न्यूनतम वेतन और समय पर भुगतान, PF और ग्रेच्युटी के लिए कानूनी वेतन आधार, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को एक साल बाद ग्रेच्युटी, छुट्टी के नियम और एनकैशमेंट, मुफ्त सालाना हेल्थ चेक-अप, और नौकरी छोड़ने पर दो कार्य दिवस में बकाया वेतन।
एक नजर में
- अपॉइंटमेंट लेटर नहीं है तो मांगें।
- अपनी सैलरी स्लिप में वेतन के हिस्से, PF और वेतन पर्ची जांचें।
- फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को एक साल की सेवा के बाद ग्रेच्युटी मिलती है।
- नौकरी छोड़ने के दो कार्य दिवस के भीतर अंतिम वेतन देय है।
एक-एक करके क्या जांचें
| विषय | कोड क्या कहते हैं | पेज |
|---|---|---|
| अपॉइंटमेंट लेटर | अनिवार्य | अपॉइंटमेंट लेटर |
| वेतन | तय तारीखें; न्यूनतम वेतन का फ्लोर | मजदूरी संहिता |
| वेतन का ढांचा | वेतन की एक परिभाषा, 50% नियम | वेतन का नियम |
| इन-हैंड सैलरी | नियोक्ता के स्ट्रक्चर पर निर्भर | टेक-होम वेतन |
| ग्रेच्युटी | 5 साल; फिक्स्ड-टर्म के लिए 1 साल | ग्रेच्युटी |
| घंटे और ओवरटाइम | 8 घंटे, हफ्ते में 48; ओवरटाइम दोगुनी दर पर | काम के घंटे |
| छुट्टी | पात्र होने के लिए 180 दिन; एनकैशमेंट | छुट्टी |
| नौकरी छोड़ना | दो कार्य दिवस में वेतन | फुल एंड फाइनल सेटलमेंट |
अगर आप कॉन्ट्रैक्ट पर हैं
सीधे फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को वेतन और लाभ में बराबरी मिलती है (फिक्स्ड-टर्म गाइड)। अगर आपको कोई ठेकेदार रखता है, तो मुख्य नियोक्ता कल्याण सुविधाएं देता है और ठेकेदार के न देने पर वेतन भी देना होता है।
अगर आप जल्द इस्तीफा देने वाले हैं
अपने ग्रेच्युटी के साल, छुट्टी का बैलेंस और नोटिस का हिसाब लगाएं। पढ़ें भारत में नोटिस पीरियड और रेजिग्नेशन लेटर का फॉर्मेट इस्तेमाल करें।
समस्या कहां उठाएं
पहले HR और अपनी शिकायत निवारण समिति से शुरू करें, अगर आपके नियोक्ता के पास है (20 या ज्यादा कर्मचारी)। फिर उपयुक्त सरकार के श्रम विभाग के पास जाएं। औद्योगिक संबंध संहिता के तहत कर्मचारी शिकायत का कारण बनने के एक साल के भीतर समिति में आवेदन कर सकता है।
एक सावधानी
कोड न्यूनतम तय करते हैं। आपका कॉन्ट्रैक्ट, राज्य का बेहतर कानून या कोई अवार्ड इससे ज्यादा दे सकता है। अगर कोई नियम किसी फैसले के लिए मायने रखता है, तो किसी योग्य सलाहकार से पुष्टि कर लें।
स्रोत
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- PIB, India's Labour Reforms: Simplification, Security, and Sustainable Growth (21 Nov 2025), https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2192524®=3&lang=2, checked 2026-10-31
- Ministry of Labour and Employment, Compliance Handbook for Employers under the Four Labour Codes (Central Government sphere), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2026/02/83978455025732b99b0165def80ab171.pdf, checked 2026-10-31
- The Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 (official text), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2025/07/36fcfa5d8e6b9145e282bf7b950d6c47.pdf, checked 2026-10-31
- The Code on Social Security, 2020 (official text), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2025/07/b0620548445580767b5c0d18c95c26f7.pdf, checked 2026-10-31
- The Code on Wages, 2019 (official text), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2025/06/c328da14bbb15fc4ad571dc33e7a4ab3.pdf, checked 2026-10-31
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी, टैक्स या इमिग्रेशन सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं और आपकी स्थिति अलग हो सकती है। किसी लाइसेंस प्राप्त वकील या योग्य सलाहकार से परामर्श करें।