भारत की व्यावसायिक सुरक्षा संहिता में छुट्टी के नियम क्या हैं?
भारत की व्यावसायिक सुरक्षा संहिता की धारा 32 के छुट्टी के नियम कहते हैं कि कैलेंडर वर्ष में 180 दिन या ज्यादा काम करने वाले कर्मचारी को हर 20 दिन के काम पर एक दिन की वेतन सहित सालाना छुट्टी मिलती है। 30 दिन आगे ले जा सकते हैं, और छुट्टी भुनाई भी जा सकती है।
एक नजर में
- पात्रता: कैलेंडर वर्ष में 180 दिन या ज्यादा काम।
- जमा होना: हर 20 दिन के काम पर 1 दिन (किशोर और जमीन के नीचे खदान में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए हर 15 दिन पर 1)।
- आगे ले जाना: 30 दिन तक; मना की गई छुट्टी बिना सीमा के आगे ले जाई जा सकती है।
- एनकैशमेंट: मांगने पर साल के अंत में, और नौकरी छोड़ते समय।
भारत की व्यावसायिक सुरक्षा संहिता में छुट्टी के नियम कैसे काम करते हैं?
- लेऑफ, मैटरनिटी लीव और ली गई सालाना छुट्टी 180 दिन में गिने जाते हैं, लेकिन उनसे छुट्टी जमा नहीं होती।
- छुट्टी की अवधि के बीच पड़ने वाले अवकाश गिनी गई छुट्टी से बाहर रखे जाते हैं।
- जो कर्मचारी 1 जनवरी के बाद जॉइन करते हैं, उन्हें छुट्टी मिलती है अगर वे साल के बाकी दिनों के एक-चौथाई दिन काम करें।
आगे ले जाना और एनकैशमेंट
मंत्रालय के अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के अनुसार कर्मचारी अगले कैलेंडर वर्ष में 30 दिन तक आगे ले जा सकता है, और जिस छुट्टी के लिए आवेदन किया गया पर मिली नहीं, वह बिना सीमा के आगे ले जाई जा सकती है। कोड में एनकैशमेंट की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है। 30 दिन से ज्यादा की छुट्टी, अगर आवेदन किया गया और मिली नहीं, तो कैलेंडर वर्ष के अंत में भुनाई जा सकती है, और कर्मचारी को नौकरी छोड़ते समय अपनी जमा छुट्टी भुनाने का हक है। देखें छुट्टी का एनकैशमेंट।
नौकरी छोड़ते समय
अगर कर्मचारी को डिस्चार्ज या बर्खास्त किया जाता है या वह खुद छोड़ता है, तो जमा छुट्टी के बदले का वेतन छोड़ने के बाद दूसरे कार्य दिवस के खत्म होने से पहले देय है। सेवानिवृत्ति या मृत्यु पर अवधि दो महीने है। यह फुल एंड फाइनल सेटलमेंट में जुड़ता है।
किन पर लागू होता है?
मंत्रालय के अनुसार छुट्टी के प्रावधान कर्मचारियों पर लागू होते हैं, और उन सुपरवाइजरों पर जिनका वेतन 18,000 रुपये प्रति माह तक है। बाकी अपने कॉन्ट्रैक्ट और राज्य के कानून से चलते हैं। जहां राज्य का कानून ज्यादा फायदेमंद है, वहां कर्मचारी वह लाभ रखता है; असंगत राज्य प्रावधानों पर कोड भारी पड़ता है।
यह पेज क्या कवर नहीं करता
आकस्मिक छुट्टी, बीमारी की छुट्टी और सार्वजनिक अवकाश राज्य के कानून, नियमों और कंपनी की पॉलिसी पर निर्भर हैं। मैटरनिटी लीव मातृत्व लाभ में कवर है। नियोक्ता के नजरिए के लिए देखें नियोक्ताओं के लिए क्या बदलता है।
स्रोत
- The Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 (official text), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2025/07/36fcfa5d8e6b9145e282bf7b950d6c47.pdf, checked 2026-10-31
- Ministry of Labour and Employment, FAQs on the OSH Code, 2020, https://www.labour.gov.in/static/uploads/2026/01/fb8c6466d0d6a7ed581bcb2bee34694c.pdf, checked 2026-10-31
- Ministry of Labour and Employment, Additional FAQs on Labour Codes (as on 16 Mar 2026), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2026/03/a4ccf4c6d97c4f1f36a6d83f8c64213d.pdf, checked 2026-10-31
- Ministry of Labour and Employment, Compliance Handbook for Employers under the Four Labour Codes (Central Government sphere), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2026/02/83978455025732b99b0165def80ab171.pdf, checked 2026-10-31
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी, टैक्स या इमिग्रेशन सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं और आपकी स्थिति अलग हो सकती है। किसी लाइसेंस प्राप्त वकील या योग्य सलाहकार से परामर्श करें।