लेबर कोड के तहत भारत में काम के घंटे और ओवरटाइम के नियम क्या हैं?
भारत में लेबर कोड के तहत व्यावसायिक सुरक्षा संहिता सामान्य काम के घंटे दिन में 8 और हफ्ते में 48 तय करती है। ओवरटाइम के लिए कर्मचारी की सहमति चाहिए और वह सामान्य दर से दोगुनी दर पर मिलता है। कोई भी कर्मचारी हफ्ते में छह दिन से ज्यादा काम नहीं कर सकता। बाकी ब्योरा सरकारी नियमों से आता है।
एक नजर में
- दिन में 8 घंटे, हफ्ते में 48 घंटे।
- ओवरटाइम: सामान्य दर से दोगुना, कर्मचारी की सहमति से।
- साप्ताहिक छुट्टी: हफ्ते में छह कार्य दिवस से ज्यादा नहीं, छूट मिलने पर बदले की छुट्टी के साथ।
- महिलाएं सहमति और सुरक्षा इंतजामों के साथ रात में काम कर सकती हैं।
मानक
व्यावसायिक सुरक्षा संहिता की धारा 25 दैनिक सीमा आठ घंटे तय करती है, जिसमें अंतराल और स्प्रेड-ओवर उपयुक्त सरकार अधिसूचित करती है। मंत्रालय का सारांश और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न हफ्ते के 48 घंटे बताते हैं।
क्या दिन 8 घंटे से ज्यादा का हो सकता है?
हां, शर्तों के साथ। मंत्रालय के अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के अनुसार कोड कर्मचारी की सहमति से, सामान्य दर से दोगुनी दर पर ओवरटाइम देकर, दैनिक घंटे बढ़ाने की छूट देता है, और सरकार अधिकतम सीमा तय कर सकती है। मंत्रालय का PIB सारांश कुछ क्षेत्रों के लिए दैनिक 8 से 12 घंटे का जिक्र करता है। इससे हफ्ते के 48 घंटे का मानक नहीं हटता। अपने राज्य और क्षेत्र के नियम जांचें।
ओवरटाइम
- जब काम दैनिक या साप्ताहिक सीमा से ज्यादा हो तब देय; अवधि दैनिक या साप्ताहिक आधार पर गिनी जाती है, जो कर्मचारी के पक्ष में हो (धारा 27)।
- मंत्रालय के अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के अनुसार यह हर वेतन-अवधि के अंत में दिया जाता है।
- ओवरटाइम के लिए कर्मचारी की सहमति जरूरी है।
- मजदूरी संहिता के तहत वे कर्मचारी भी ओवरटाइम के पात्र हैं जिनकी न्यूनतम वेतन दर कोड के तहत तय है।
साप्ताहिक छुट्टी और शिफ्ट
किसी भी कर्मचारी से हफ्ते में छह दिन से ज्यादा काम नहीं कराया जा सकता। अगर किसी छूट से साप्ताहिक छुट्टी हट जाती है, तो बदले की छुट्टियां उसी महीने में या अगले दो महीनों में देनी होती हैं।
महिलाओं का रात का काम
महिलाओं को सभी प्रतिष्ठानों और सभी तरह के कामों में अनुमति है। सुबह 6 बजे से पहले या शाम 7 बजे के बाद के काम के लिए उनकी सहमति और तय सुरक्षा उपाय, जैसे परिवहन और सुरक्षा इंतजाम, जरूरी हैं।
"वर्कर" कौन गिना जाता है?
व्यावसायिक सुरक्षा संहिता की "वर्कर" की परिभाषा उन सुपरवाइजरों को बाहर रखती है जिनकी कमाई 18,000 रुपये प्रति माह (या अधिसूचित रकम) से ज्यादा है। मैनेजर और ज्यादा कमाने वाले सुपरवाइजर अपने कॉन्ट्रैक्ट और राज्य के नियमों से चलते हैं।
व्यावहारिक कदम
नियोक्ता: घंटे और ओवरटाइम पांच साल तक रखे जाने वाले रजिस्टरों में दर्ज करें। कर्मचारी: अगर आपसे ज्यादा काम करने को कहा जाए तो अपना रिकॉर्ड खुद रखें और अपनी सैलरी स्लिप जांचें। छुट्टी के लिए देखें छुट्टी के नियम।
स्रोत
- The Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 (official text), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2025/07/36fcfa5d8e6b9145e282bf7b950d6c47.pdf, checked 2026-10-31
- Ministry of Labour and Employment, FAQs on the OSH Code, 2020, https://www.labour.gov.in/static/uploads/2026/01/fb8c6466d0d6a7ed581bcb2bee34694c.pdf, checked 2026-10-31
- Ministry of Labour and Employment, Additional FAQs on Labour Codes (as on 16 Mar 2026), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2026/03/a4ccf4c6d97c4f1f36a6d83f8c64213d.pdf, checked 2026-10-31
- PIB, India's Labour Reforms: Simplification, Security, and Sustainable Growth (21 Nov 2025), https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2192524®=3&lang=2, checked 2026-10-31
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यह सामान्य जानकारी है, कानूनी, टैक्स या इमिग्रेशन सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं और आपकी स्थिति अलग हो सकती है। किसी लाइसेंस प्राप्त वकील या योग्य सलाहकार से परामर्श करें।