लेबर कोड में वेतन की परिभाषा क्या है?
भारत की मजदूरी संहिता, 2019 की परिभाषा के अनुसार वेतन का मतलब काम के बदले कर्मचारी को देय सारा पारिश्रमिक है, जिसमें से कुछ गिनाई गई मदें बाहर रखी जाती हैं। अगर ये बाहर रखी गई मदें कुल पारिश्रमिक के 50% से ज्यादा हो जाएं, तो अतिरिक्त हिस्सा वेतन में वापस जोड़ दिया जाता है। श्रम और रोजगार मंत्रालय के अनुसार यह परिभाषा 21 नवंबर 2025 से लागू है।
50% नियम
मंत्रालय के अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों के अनुसार, जहां भत्ते और बाकी बाहर रखी गई मदें पारिश्रमिक के 50% से ज्यादा हों, वहां 50% से ऊपर का हिस्सा वेतन की गणना में जोड़ा जाता है। इस 50% की जांच में वैधानिक मदें, जैसे PF और पेंशन योगदान में नियोक्ता का हिस्सा और वैधानिक बोनस, गिनी जाती हैं, जबकि ग्रेच्युटी, ESI और रिटायरमेंट के बाकी लाभ नहीं गिने जाते। ओवरटाइम भत्ता भी इस जांच में बाहर रखी गई मदों का हिस्सा माना जाता है।
यह आपके लिए क्यों मायने रखता है
वेतन से जुड़ी गणनाएं, जिनमें ग्रेच्युटी भी शामिल है, इस परिभाषा से प्रभावित होती हैं, और मंत्रालय के अनुसार संशोधित परिभाषा ग्रेच्युटी की गणना के लिए 21 नवंबर 2025 से लागू है। इससे यह भी बदल सकता है कि CTC (कॉस्ट टू कंपनी) मूल वेतन और भत्तों में कैसे बांटा जाता है। यह न्यूनतम वेतन से अलग है, जिसे उपयुक्त सरकार तय करती है, जबकि वेतन नियोक्ता और कर्मचारी आपस में तय करते हैं।
उदाहरण
एक कर्मचारी का कुल पारिश्रमिक इस तरह बंटा है कि बाहर रखे गए भत्ते उसके आधे से ज्यादा हैं। नियम के अनुसार 50% से ऊपर की रकम को वेतन माना जाता है, इसलिए वैधानिक गणनाओं के लिए वेतन आधार अकेले मूल वेतन से ज्यादा होता है।
संबंधित शब्द और गाइड
स्रोत
- Ministry of Labour and Employment, Additional FAQs on Labour Codes (as on 16 Mar 2026), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2026/03/a4ccf4c6d97c4f1f36a6d83f8c64213d.pdf, 31 अक्टूबर 2026 को देखा गया
यह सामान्य जानकारी है, कानूनी, टैक्स या इमिग्रेशन सलाह नहीं। नियम बदलते रहते हैं और आपकी स्थिति अलग हो सकती है। किसी लाइसेंस प्राप्त वकील या योग्य सलाहकार से सलाह लें।