औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 में क्या बदलता है?
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 ने ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926, औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 की जगह ली है। यह ट्रेड यूनियन, रोजगार की शर्तें, लेऑफ और छंटनी, और विवादों को कवर करती है। यह फिक्स्ड-टर्म रोजगार को कानूनी आधार भी देती है।
एक नजर में
- फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को वैसा ही काम करने वाले स्थायी कर्मचारियों जैसा वेतन और लाभ मिलता है।
- स्टैंडिंग ऑर्डर 300 या ज्यादा कर्मचारियों वाले औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर लागू होते हैं।
- जहां 20 या ज्यादा कर्मचारी हैं वहां शिकायत निवारण समिति जरूरी है।
- छंटनी के लिए नोटिस और मुआवजा चाहिए; बड़ी फैक्ट्रियों, खदानों और बागानों को सरकार की अनुमति चाहिए।
फिक्स्ड-टर्म रोजगार
कोड सीधे, समय-सीमा वाले कॉन्ट्रैक्ट की अनुमति देता है, जिसमें वेतन और लाभ में बराबरी है और एक साल बाद ग्रेच्युटी की पात्रता है। देखें फिक्स्ड-टर्म रोजगार।
स्टैंडिंग ऑर्डर और शिकायत समितियां
मंत्रालय की हैंडबुक के अनुसार स्टैंडिंग ऑर्डर 300 या ज्यादा कर्मचारियों वाले औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर लागू होते हैं, और नियोक्ता मॉडल स्टैंडिंग ऑर्डर अपनाकर प्रमाणन अधिकारी को सूचित कर सकते हैं। 20 या ज्यादा कर्मचारियों वाले औद्योगिक प्रतिष्ठान को शिकायत निवारण समिति बनानी होती है, जिसमें नियोक्ता और कर्मचारियों का बराबर प्रतिनिधित्व हो, महिलाओं का कम से कम आनुपातिक प्रतिनिधित्व हो, और आवेदन मिलने से 30 दिन में फैसला हो।
लेऑफ, छंटनी और बंदी
| मद | हैंडबुक क्या कहती है |
|---|---|
| लेऑफ का मुआवजा | मूल वेतन का 50% और महंगाई भत्ता |
| छंटनी का नोटिस | 50 से 299 कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए एक महीना; 300 या ज्यादा के लिए तीन महीने |
| छंटनी का मुआवजा | सेवा के हर पूरे साल के लिए 15 दिन का औसत वेतन |
| री-स्किलिंग फंड | छंटनी किए गए हर कर्मचारी के लिए 15 दिन का वेतन, जो फंड में जमा होता है |
| बंदी | 60 दिन का नोटिस (50 से 299 कर्मचारी) या 90 दिन पहले आवेदन (300 या ज्यादा) |
300 या ज्यादा कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को लेऑफ, छंटनी या बंदी के लिए उपयुक्त सरकार से पहले अनुमति लेनी होती है।
ट्रेड यूनियन और हड़ताल
जिस यूनियन के पास मस्टर रोल के 51% या ज्यादा कर्मचारी हों, उसे बातचीत करने वाली यूनियन माना जाता है; वरना कम से कम 20% समर्थन वाली यूनियनों से एक बातचीत परिषद बनती है। मंत्रालय के सारांश में हड़ताल और तालाबंदी के लिए 14 दिन का नोटिस बताया गया है, और "हड़ताल" की परिभाषा में सामूहिक आकस्मिक छुट्टी भी जोड़ी गई है।
"वर्कर" कौन है?
कोड उन लोगों को बाहर रखता है जो मुख्य रूप से प्रबंधकीय या प्रशासनिक भूमिका में काम करते हैं, और उन सुपरवाइजरों को जिनकी कमाई अधिसूचित रकम से ज्यादा है (मंत्रालय की सामग्री में फिलहाल 18,000 रुपये प्रति माह बताई गई है)। यही सीमा तय करती है कि कौन-सी सुरक्षा लागू होगी, इसलिए अपनी भूमिका खुद जांचें।
नियोक्ताओं के लिए: औद्योगिक संबंध संहिता, 2020
स्टैंडिंग ऑर्डर, शिकायत निवारण व्यवस्था और एग्जिट प्रक्रियाओं की समीक्षा करें। पढ़ें नियोक्ताओं के लिए क्या बदलता है।
स्रोत
- Ministry of Labour and Employment, Compliance Handbook for Employers under the Four Labour Codes (Central Government sphere), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2026/02/83978455025732b99b0165def80ab171.pdf, checked 2026-10-31
- PIB, India's Labour Reforms: Simplification, Security, and Sustainable Growth (21 Nov 2025), https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2192524®=3&lang=2, checked 2026-10-31
- Ministry of Labour and Employment, FAQs on Labour Codes (Dec 2025), https://www.labour.gov.in/static/uploads/2026/01/de4758d5bfeffc456d7de97a801891b0.pdf, checked 2026-10-31
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