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भारत में बैकग्राउंड वेरीफिकेशन: उम्मीदवारों को क्या उम्मीद रखनी चाहिए

LiveRec Editorialअपडेट किया गया

भारत में बैकग्राउंड वेरीफिकेशन (BGV) वह जांच है जो कई नियोक्ता ऑफर के बाद, अक्सर किसी बाहरी एजेंसी से करवाते हैं। इसमें आपकी पहचान, पढ़ाई और पिछली नौकरियों की पुष्टि होती है। अपने डॉक्यूमेंट तैयार रखें, सही जानकारी दें, और किसी भी गैप या मिसमैच के बारे में रिक्रूटर को पहले बता दें, क्योंकि देरी की आम वजह बेमेल जानकारी होती है।

एक नजर में

  • BGV आमतौर पर ऑफर के बाद, और जॉइनिंग से पहले या ठीक बाद होता है।
  • आम जांचें: पहचान, पता, पढ़ाई, पिछली नौकरी, कभी-कभी आपराधिक रिकॉर्ड और रेफरेंस।
  • ऐसी जानकारी दें जो आपके डॉक्यूमेंट से बिल्कुल मिले।
  • पूछें कि एजेंसी को कौन-से डॉक्यूमेंट और किस फॉर्मेट में चाहिए।
  • जांच शुरू होने से पहले अक्सर उम्मीदवार से सहमति ली जाती है।

नियोक्ता क्या जांचते हैं?

जांचआमतौर पर मांगे जाने वाले डॉक्यूमेंट
पहचाननियोक्ता के बताए अनुसार सरकारी ID
पताबिजली बिल या रेंट एग्रीमेंट जैसा प्रमाण
पढ़ाईडिग्री और मार्कशीट
नौकरीऑफर, अपॉइंटमेंट और रिलीविंग लेटर, सैलरी स्लिप
रेफरेंसपिछले मैनेजर के संपर्क की जानकारी
आपराधिक रिकॉर्डघोषणा और, जहां लागू हो, पुलिस जांच

सटीक जांचें नियोक्ता, रोल और सेक्टर पर निर्भर करती हैं।

तैयारी कैसे करें

  1. अपने डॉक्यूमेंट की स्कैन की हुई कॉपी साफ फाइलों में जमा करें।
  2. पक्का करें कि सभी डॉक्यूमेंट में नाम, तारीखें और पद एक जैसे हों।
  3. नौकरी छोड़ने से पहले अपना एक्सपीरियंस या रिलीविंग लेटर मांग लें। देखें भारत में नोटिस पीरियड।
  4. किसी गैप या नाम के फर्क के बारे में रिक्रूटर को प्रमाण के साथ बताएं। देखें गैप के बारे में कैसे बताएं।
  5. एजेंसी के ईमेल का जल्दी जवाब दें।

आम समस्याएं

  • पिछले नियोक्ता से रिलीविंग लेटर न मिलना।
  • अलग-अलग डॉक्यूमेंट में नाम की स्पेलिंग अलग होना।
  • रिज्यूमे की तारीखों का लेटर से मेल न खाना।
  • पुरानी कंपनी का बंद हो चुका होना।

अगर कोई डॉक्यूमेंट नहीं है, तो रिक्रूटर से पूछें कि वे और क्या मानते हैं, जैसे सैलरी स्लिप या बैंक स्टेटमेंट।

BGV का प्रोसेस स्टेप-दर-स्टेप

  1. ऑफर और सहमति। नियोक्ता की HR टीम BGV फॉर्म या लिंक भेजती है और आपकी सहमति मांगती है।
  2. डॉक्यूमेंट अपलोड करें। आप स्कैन जमा करते हैं और तारीखें, पते और रेफरी के संपर्क भरते हैं।
  3. एजेंसी की जांच। एजेंसी यूनिवर्सिटी, पिछले नियोक्ताओं और रेफरी से संपर्क करती है, और पते की जांच भी कर सकती है।
  4. रिपोर्ट। एजेंसी नियोक्ता को रिपोर्ट भेजती है, जिस पर क्लियर, विसंगति या पेंडिंग लिखा होता है।
  5. नियोक्ता का फैसला। किसी मिसमैच पर HR आपसे संपर्क करती है। नियोक्ता के हिसाब से जॉइनिंग क्लियर रिपोर्ट आने तक रुक सकती है।

कितना समय लगेगा, यह नियोक्ता, पिछली कंपनियों की संख्या और उनके जवाब देने की रफ्तार पर निर्भर है। कोई समय मान लेने की जगह HR से अनुमानित समयसीमा पूछें।

डॉक्यूमेंट चेकलिस्ट

चीजतैयार रखें
पहचाननियोक्ता की बताई ID, जिसमें नाम बिल्कुल वैसा हो जैसा आपके रिज्यूमे में है
पढ़ाईडिग्री सर्टिफिकेट, सभी सेमेस्टर की मार्कशीट, और नाम बदलने का कोई प्रमाण
पिछले तीन नियोक्ताऑफर लेटर, रिलीविंग या एक्सपीरियंस लेटर, हाल की सैलरी स्लिप
पतामौजूदा और स्थायी पते का प्रमाण, अगर मांगा जाए
गैप का प्रमाणलंबे ब्रेक के लिए लेटर या सर्टिफिकेट, देखें करियर गैप गाइड

आम मिसमैच कैसे ठीक करें

समस्याक्या करें
नाम की स्पेलिंग अलग हैनामों को जोड़ने वाली ID या एफिडेविट भेजें, अगर नियोक्ता उसे मानता है
तारीख में कुछ दिनों का फर्क हैअपना रिज्यूमे सुधारें या पुराने नियोक्ता से ठीक किया हुआ लेटर मांगें
कंपनी बंद हो गईसैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट या रेफरी के तौर पर किसी सहकर्मी को दें, अगर एजेंसी उन्हें मानती है
रिलीविंग लेटर में देरीइस्तीफा स्वीकार होने वाला ईमेल दें और पूछें कि अस्थायी तौर पर कौन-सा प्रमाण मान्य है
पढ़ाई के अंक अलग हैंआधिकारिक मार्कशीट भेजें और एक लाइन में वजह बताएं

देरी कराने वाली गलतियां

  • लेटर जांचने की जगह तारीखों का अंदाजा लगाना।
  • जल्दी छोड़ी हुई छोटी नौकरी का जिक्र न करना और उम्मीद करना कि कोई नहीं जांचेगा।
  • एजेंसी के पकड़ने से पहले HR को गैप के बारे में न बताना।
  • स्पैम में गए एजेंसी के ईमेल को अनदेखा करना। अपना स्पैम फोल्डर जांचें।
  • इतनी अंधेरी फोटो में डॉक्यूमेंट भेजना कि पढ़े ही न जा सकें।

नकली BGV अनुरोधों से सावधान रहें

असली नियोक्ता वेरीफिकेशन के लिए पैसे नहीं मांगता। अगर कोई फीस मांगे या किसी साफ प्रक्रिया के बाहर संवेदनशील जानकारी मांगे, तो रुक जाएं और पढ़ें नकली जॉब ऑफर की पहचान कैसे करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या BGV के बाद ऑफर वापस लिया जा सकता है? हां, अगर नियोक्ता को अपनी पॉलिसी के हिसाब से कोई गंभीर मिसमैच मिले। अपने ऑफर लेटर की शर्तें देखें।

क्या सहमति देना जरूरी है? नियोक्ता आमतौर पर आपकी लिखित या इलेक्ट्रॉनिक सहमति मांगते हैं। कोई चिंता हो तो HR टीम से पूछें कि आपके डेटा का इस्तेमाल और स्टोरेज कैसे होता है।

क्या यह अमेरिका जैसा ही है? मकसद मिलता-जुलता है, नियम अलग हैं। अमेरिका के लिए देखें उम्मीदवार के तौर पर बैकग्राउंड चेक।

इसमें कितना समय लगता है? यह नियोक्ता और जांचों की संख्या पर निर्भर है। HR से अनुमानित समय पूछें।

अगर मेरा रिलीविंग लेटर नहीं है तो क्या करूं? तुरंत HR को बताएं, इस्तीफा स्वीकार होने वाला ईमेल और सैलरी स्लिप दें, और पूछें कि वे और कौन-सा प्रमाण मानते हैं।

क्या नाम का मिसमैच समस्या बन सकता है? इससे जांच धीमी हो सकती है। नामों को जोड़ने वाली ID या एफिडेविट भेजें, अगर नियोक्ता उसे मानता है।

अगला कदम

एक फोल्डर बनाएं जिसमें आपकी ID, पढ़ाई और नौकरी के डॉक्यूमेंट हों, और जांच लें कि जानकारी आपस में मिलती है।

यह पेज सामान्य करियर जानकारी है।